दौलत शौक भुख ये तीनों चीज़ें अयसी हय जो इन्सान को नीचे से नीचा काम करने पर मज्बूर कर देती हय। इस लिये प्रकाश और भोलाभगवान फीलम कंम्पनी के शोखमें हीरो बनने के लीये बम्बई पहोंच गये मगर भुखने इन्हे टरनरफिटरकी नोकरी करने पर मजबुर कर दिआ, लेहाज़ा प्रकाश के मजबुर करने पर भोलेभगवान भुलेसे अेके नाटक कम्पनी मे घुस पड़े वहां के शेठ कैलाशचन्द जी का दीमाग कुच्छ बीगड़ा हुआ था प्रकाश और भोला को सरकारी आदमी समजकर इनकी इज्जत करने लगे मगर जब ये मालुम हुआ के ये लोग नौकरी की गरज से आअे हय तो इन्हे बाहर नीकालने पर आमादा हो गअे मगर भगावान को कुच्छ इन दोनों के लीअे अच्छा ही मंजूर थी लेहाजा कुच्छ वाकेआज अेयसे सामने आअे के वो दोनो हीरो बन ही गअे।
अेक रोज़ कैलाशचन्द जी जबके अपनी बेटी सरला को अपनी जागीर और पंदरालाख रुपीअे की मालकन बना रहे थे कि मेनेजर बहेराम ने सुनते ही कुच्छ अपना इरादा तबदील कर दीआ के खुद मालकि बन बैठे- इसीकी खोज में वो प्रकाश और भोलेभगवान का दुशमन हो गया, यहां तक के सरला को गाअेब करवाके बदनामी इन दोनों के सर थोप दी- तरेह तरेह की मुशीबते पहोंचाने की कोशीश करने लगा, मगर भगवान जो चाहता हय वही होता हय और हमारी कहानी मेभी येही होकर रहा।
प्रकाश भोलेभगवान और सरला का क्या हुआ? बहेराम और उसके साथिओं की क्या हालत हुइ? नाटक कम्पनी कबतक चली-कैलाश जी को इनकी सरला मीली या नहीं? यह आप सुनेरी परदे पर आकर देखीअे।
[from the official press booklet]